अक्सर कंपनी दुश्मनो की है तो बायकाट कैसे मुमकिन है




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अक्सर कंपनी दुश्मनो की है तो बायकाट कैसे मुमकिन है

⭕आज का सवाल नंबर ३३७५⭕

मे यहूदी और अमरीकी दुश्मन कंपनी का बायकाट करना चाहता हूँ। लेकिन में जितनी चीज़ें इस्तेमाल करता हूँ उस में से अक्सर दुश्मनो कंपनी की है, और दूसरी कंपनी की चीज़ उम्दा नहीं मिलती, लिहाज़ा मुक़म्मल बायकाट मुमकिन नहीं।
और बायकाट की आवाज़ ७० साल से लग रही है और बायकाट हुवा भी है तो उससे क्या फ़ायदा हुवा ?
ज़ुल्म तो रुका नहीं और हमारे बायकाट करने से उन को क्या फ़र्क़ पडेगा ? वह तो बहुत मालदार कंपनियां है।

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

हज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:
जिसने अल्लाह के लिए दिया और अल्लाह के लिए रुका और अल्लाह के लिए मुहब्बत की और अल्लाह के लिए दुश्मनी की उसका इमान मुक़म्मल हो गया।
📖बुखारी शरीफ

👉बायकाट का मक़सद अल्लाह के लिए दुश्मनी का इज़हार और दुश्मन को नफ़ा पहोंचने से रुकना है।

👉अगर कोई हमारे घरवालों का क़ातिल हो तो क्या हम उसकी कंपनी की कोई चीज़ खरीदेंगे?
वहां सोचेंगे के मेरे अकेले के न ख़रीदने से उस का क्या नुक़्सान होगा ??

हमारे इख़्तियार में इस्लाम और मुसलमान के दुश्मन से मन से नाराज़गी का इज़हार है। इमान के इस तकाज़े को पूरा करना है। नतीजे के हम मुकल्लफ़ नहीं।

हर चीज़ का ऑप्शन तलाश करने की कोशिश की जाये, जहाँ कोई ज़रूरी चीज़ का ऑप्शन न मिले वहां मजबूरी है, वहां ख़रीदने में हरज नहीं।

नोट:- पूरी दुनिया में तकरीबन मुसलमानो की कुल आबादी 2 बिलियन है यानी 200 करोड़ जो के पूरी दुनिया का 25% बनता है अगर सारे के सारे मुसलमान इसके बायकाट का पक्का अजम (प्रतिबद्धता) करें तो बहुत बड़ा नुकसान कंपनी को उठाना पड़ेगा।

و الله اعلم بالصواب

✅®️ तस्दीक़
१. हज़रत मुफ़्ती क़दीम माला सदर दारुल इफ्ता वल इरशाद गोधरा दा.ब
२. मुफ़्ती अशफ़ाक़ सीरगर सुरती दा.ब

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.