इज्तिमाई क़ुरबानी में जानवर तय करना ज़रूरी

इज्तिमाई क़ुरबानी में जानवर तय करना ज़रूरी

⭕आज का सवाल नंबर -३२३६⭕

आज कल बाज़ लोग बड़े जानवर की इज्तिमाई क़ुरबानी करने के वकील बनते है और सब की तरफ से जानवर ख़रीदते है।
लेकिन ये तय नहीं करते के किस जानवर में किस का हिस्सा है और कौनसा जानवर किस का है?

इस तरह क़ुरबानी सहीह होगी?

बाज़ लोग जब ज़बह करते है उस वक़्त तय करते है ऐसा करना कैसा है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

वकील के लिए जानवर ख़रीदते वक़्त या खरीदे हुवे जानवर के पैसे लेते वक़्त या आखिर कुरबानी करते वक्त तय करना और उस की तरफ से जानवर पर क़ब्ज़ा करना या करवाना ज़रूरी है, वरना क़ुरबानी सहीह नहीं होगी।

इस की आसान शकल ये है के सात सात हिस्से की जितनी रशीद बँटी है वह रशीद नंबर उस जानवर पर लिखते रहे, या जानवर पहले से खरीदे है तो जानवर पर एक दो तिन नंबर लगाते जाये, वह नंबर रशीद पर लिखते जाये ताके क़ुरबानी सहीह अदा हो।
और ऐसा न करे के आखरी दिन हिस्से या जानवर तय करे,
अगर ज़बह करते वक़्त तय किया जायेगा तो उस के पहले कई खराबी पैदा हो सकती है, मसलन कभी जानवर मर जाए, बीमार पड़ जाए, खो जाए, पकडा जाये तो कैसे पता चलेगा के किस का नुक़्सान हुवा है और किन लोगों का जानवर क़ुरबानी से रेह गया है ?
ऐसे मसाइल पेश न आये इसलिये पैसे लेते वक़्त या ख़रीदते वक़्त मालिक का तय होना ज़रूरी है।

و الله اعلم بالصواب

आलमगिरी १/१३ से माखूज

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.