यूसीसी की मुख़ालिफत ईमानी फ़रीज़ा








यूसीसी की मुख़ालिफत ईमानी फ़रीज़ा

⭕आज का सवाल नंबर ३३९१⭕

हमारे मुल्क में यूनिफार्म सिविल कॉर्ड लाने की बात हो रही है और लॉ कमीशन ने देश के तमाम लोगों से राइ मांगी है के ये क़ानून हम लाए या नहीं तो इस बारे में राय देने का शरई हुक्म क्या है?
इसकी आखरी मुद्दत २८ जुलाई है।

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

हमारा पर्सनल लॉ कुरान और हदीस से साबित है जो अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का बनाया हुवा है, जो क़यामत तक के हालात, तबदीली और तरक़्क़ी को देख कर बनाया गया है, और ये तमाम क़ानून इंसानी की फ़ितरत, सहीह तबियत के बिलकुल मुवाफ़िक़ है, इसमें मर्द, ओरत, बच्च्चे, बूढ़े हर एक की री’आयात और हुक़ूक़ का पूरा ख्याल रखा गया है।

इस में तबदीली करने का इख़्तियार हमारी शरीअत में किसी को भी नहीं है, और तब्दील करना मुल्क के दस्तूर – बंधारण की क़लम- आर्टिकल २५ वग़ैरा के भी खिलाफ है।

लिहाज़ा इस क़ानून की मुख़ालिफत करना ईमानी और मुल्की फ़रीज़ा है।

इस पर अपनी राय न देकर खामोश रहने में गुनाह का मुस्तहिक़ हो सकता है।

👉लिहाज़ा निचे दी गई लिंक से जिन्हों ने अभी तक ईमेल नहीं भेजा है वह खुद भी भेजे और घर के हर फर्द से भिजवाये।
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अल्लाह तआला हमें तौफ़ीक़ अता फरमाये।

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.