हराम और नाजायज़ कमाई वाले के हिस्से में फ़र्क़

हराम और नाजायज़ कमाई वाले के हिस्से में फ़र्क़

⭕आज का सवाल नंबर ३२३७⭕

जीस की कमाई साफ़ हराम हो,
और जीस की कमाई मकरूह हो,
उन के बड़े जानवर में हिस्से लेने में क्या फ़र्क़ है ?
अहसनुल फ़तावा में नाजायज और किताबुनवाज़िल में जायज लिखा है इन दोनों में क्या तटबिक (जोड़) हैं ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

जीस की कमाई साफ़ हराम हो जैसे जुआ, शराब, सूद का कारोबार और चोरी की हो, वही नाजाइज़ हराम रक़म से शिरकत करे तो वह खुद इन रक़म का शरई तौर पर मालिक नहीं हुवा है, इसलिए किसी भी शरीक की क़ुरबानी सहीह नहीं होगी।

और मकरूह कारोबार हो जैसे राखी, पतंग वगैरह बेचना तो उस से उन रक़म का वह मालिक हो जाता है, लिहाज़ा ऐसे मकरूह कारोबार वाले के साथ शिरकत सहीह हो जाएगी और क़ुरबानी अदा हो जाएगी।

किताबंनवाज़िल में जो जवाज़ लिखा है इस से यही सुरत मुराद है।

📚मुसतफद अज़ किताबंनवाज़िल

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.